झारखंड में जमीन के नीचे छिपा तांबे का खजाना, बगोदर के अंबाडीह में मिले अहम संकेत

 रांची
बीसवीं सदी लौह की थी तो इक्कीसवीं तांबा की। यह क्रिटिकल मिनरल्स की श्रेणी में है। झारखंड के लिए सुखद यह है कि झारखंड के गिरिडीह में डुमरी के बाद बगोदर में भी ताम्र का भंडार मिला है। झारखंड सरकार के भूतत्व सर्वे के प्रारंभिक परिणाम में यह पुष्ट हो चुका है कि बगोदर के अंबाडीह में धरती के नीचे तांबा का भंडार है।

अब भूतत्व सर्वे कार्य को और व्यापक पैमाने पर किया जाएगा। ब्रिटिश काल में ही यह ज्ञात हो गया था कि गिरिडीह में धरा के नीचे ताम्र है। यह कहां पर कितना है? अब झारखंड सरकार का भूतत्व विभाग इसकी खोज में लगा है। बगोदर में ताम्र की खोज की शुरुआत 2023 में हुई।

वहां से कुछ पत्थर लिए गए। भूतत्व निदेशालय ने उन पत्थरों को जांच के लिए भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण की कोलकाता प्रयोगशाला में भेजा था। कोलकाता से जांच रिपोर्ट आई कि उन पत्थरों में ताम्र के साथ सीसा और जिंक भी प्रचुर मात्रा में है।

इस नतीजे से उत्साहित भूतत्व निदेशालय ने पिछले साल से वहां खनिज अन्वेषण के कार्य को तेज किया। आधा किमी क्षेत्र का टोपोग्राफिक सर्वे (स्थलाकृत सर्वेक्षण) किया गया। तीन स्थानों पर 200 मीटर की गहराई तक जमीन की छेदन कार्य कर अयस्क निकाला गया। उसमें भी ताम्र के अलावा और भी खनिज मिले हैं।

डुमरी के बरगुंडा में मिला बड़ा खजाना
गिरिडीह में डुमरी के बरगुंडा में तकरीबन एक वर्ग किमी की परिधि में धरा के नीचे ताम्र का विशाल खजाना मिल चुका है। वहां भू सर्वे की विवरणी शासन को दी जा चुकी है। छोटानागपुर के भूतत्व उप निदेशक कुणाल कौशल ने लगातार चार साल तक सर्वेक्षण कार्य किया। अब भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ के पर्यवेक्षण में बगोदर में ताम्र खोज का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
धरती के नीचे से निकाले गए अयस्क में तांबा की मात्रा का आकलन करते भूतत्व अधिकारी।

गुलामी काल में मुसाबनी में मिली थी खदान
झारखंड में अभी पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी प्रखंड में भारत सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान कापर लिमिटेड (एचसीएल) द्वारा ताम्र खनन किया जा रहा है। 1923 में गुलामी काल में ब्रिटिश सरकार ने मुसाबनी में तांबा खोजा था। इसके अलावा अभी मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के खेतरी में ही ताम्र खान है। गिरिडीह में तांबा का विधिवत खनन प्रारंभ हो जाएगा तो बड़ी उपलब्धि होगी।

महज तीन साल में 75 प्रतिशत हो गया महंगा
इलेक्ट्रिक वाहन और एआइ डाटा सेंटर के लिए ताम्र की वैश्विक मांग बढ़ी है। टेक इंडस्ट्रीज से जुड़ी आधारभूत संरचना में ताम्र की आवश्यकता सबसे अधिक है। तीन साल में तांबा का मूल्य 75 प्रतिशत बढ़ा है। भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में तांबा की कीमत 14 सौ रुपये किलो के आसपास है।

गिरिडीह में डुमरी के बरगुंडा में ताम्र की खोज हो चुकी है। बगोदर के अंबाडीह में भी ताम्र के भूतत्व अन्वेषण के परिणाम बेहद सकारात्मक है। भूगर्भ में तांबा मिला है। अब अन्वेषण कार्य और व्यापक किया जाएगा।
    -कुमार अमिताभ, भूतत्व निदेशक, झारखंड

 

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