1600 करोड़ के भोपाल सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का बदला प्लान, फंड जुटाएगी SPV

भोपाल 

 राजधानी में बनने वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के प्लान में बड़ा बदलाव किया गया है। अब मप्र हाउसिंग बोर्ड इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी एक्ट में स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) बनाएगा। पहली बार प्रदेश में किसी सरकारी प्रोजेक्ट के लिए एसपीवी बनाई जाएगी। यह एसपीवी ही प्रोजेक्ट का निर्माण करने से लेकर संचालन करेगी। फंड भी जुटाएगी। 1600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार को कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। खास यह है कि सतपुड़ा और विंध्याचल भवन को पहले चरण में तोड़ा नहीं जाएगा।

पहले दो सी-टाइप टावर बनाए जाएंगे। इनमें सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों के सभी दफ्तरों को शिफ्ट किया जाएगा। इतना ही नहीं, अब इन टावर के ऊपर स्कॉय वॉक नहीं बनेगा। सब-वे के जरिए दोनों टावर आपस में जुड़ेंगे। यह मंत्रालय से भी सब-वे से जुड़ें रहेंगे। नगरीय विकास विभाग और मप्र हाउसिंग बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से डीपीआर बनाई है। इसे जल्द मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति में रखा जाएगा। मंजूरी के बाद एसपीवी का गठन कर टेंडर किया जाएगा। पहले की योजना के अनुसार सरकारी खर्च से दो चरण में 13 टावर बनाने थे। इसे परगोले से जोड़ना था। अब इसे बदला गया है।

अब तीन चरणों में ऐसे होगा निर्माण
अभी विंध्याचल और सतपुड़ा भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76500 वर्ग मीटर है। नए प्रोजेक्ट के पहले चरण में सी-टाइप दो भवन बनेंगे। इनका निर्मित क्षेत्र वर्तमान से करीब डेढ़ गुना या 1 लाख लाख वर्गमीटर से अधिक होगा। दोनों भवनों में मौजूदा सभी ऑफिस शिफ्ट शिफ्ट किए किए जाएंगे। ज इसके बाद दूसरे चरण में सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों को तोड़कर एसपीवी दो कमर्शियल टावर बनाएगी। दोनों कमर्शियल भवनों को फेस वर्तमान की तरह वल्लभभवन या डायरेक्टोरेट की तरफ न होकर पीछे की ओर होगा। इसके लिए सतपुड़ा भवन की जगह बनने वाले भवन के सामने से कनेक्टिंग रोड भी बनेगी। विंध्याचल भवन के पीछे जेल रोड है, इसलिए उधर रोड नहीं बनेगी। ध्यान रखा जाएगा कि किसी वन की ऊंचाई वल्लभ भवन से अधिक न हो। भविष्य में कार्यालयों के लिए दो ब्लॉक और बनेंगे। चौथे चरण के लिए दो ब्लॉक विकसित करने की जमीन भी मौजूद रहेगी।

फाइनेंस मॉडल और सुविधाएं ऐसी
एसपीवी बैंक व वित्तीय संस्थानों से चरणबद्ध लोन लेगी। 30 साल में चुकाएगी।

पहले चरण में सी-टाइप भवन बनेंगे। इनमें शिफ्ट होने वाले सरकारी ऑफिस से किराया लेगी। फिर दो कमर्शियल भवनों में ऑफिस स्पेस बेचेगी, किराए पर देगी।

सोसायटी बनेगी। यह सभी कार्यालयों व कार्पोरेट्स से शुल्क लेकर मेंटेनेंस करेगी।

अभी मंत्रालय के सामने बने गार्डन का लेवल ऊंचा किया जाएगा। यह वर्ल्ड क्लास होगा।

गार्डन में दुर्लभ पेड़ पौधों के साथ चारों ओर हरियाली व म्यूजिकल फाउंटेन।

इसे मैसूर के बूंदावन गार्डन की तरह विकसित करेंगे। आम नागरिकों के लिए खुलेगा।

क्षेत्र में ग्रीन 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 20 किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *