JEC में टेक्नोलॉजी का महामंच, Google-Microsoft-IBM के इंजीनियर्स करेंगे छात्रों का मार्गदर्शन

जबलपुर
इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को अब देश-दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों और संस्थानों में काम कर रहे अपने सीनियर्स से सीधे सीखने का मौका मिलेगा. कॉलेज की कॉसमॉस सोसायटी द्वारा 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' का आयोजन किया जा रहा है. दो सप्ताह तक चलने वाले इस ऑनलाइन आयोजन में कॉलेज के कई पूर्व छात्रा शामिल होंगे. जिसमें गूगल, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसे बड़ी कंपनी में काम करने वाले पूर्व छात्र हैं. यहां सभी लोग छात्र और छात्रों को मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी सहित आधुनिक तकनीकों और उनके वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल की जानकारी देंगे. इसके अलावा आयोजन में आईआईटी, एनआईटी, एमएनआईटी और डीएवीवी जैसे संस्थानों की छात्र सोसायटियों को भी जोड़ा गया है। 

कॉसमॉस सोसायटी कराती है एकेडमिक एक्टिविटीज
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज एक सरकारी संस्थान है और यह मध्य प्रदेश का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज है. इसी इंजीनियरिंग कॉलेज में कॉसमॉस नाम की छात्रों की एक सोसायटी है. छात्र इस समिति के माध्यम से पूरे साल इंजीनियरों के बीच साइंटिफिक टेंपरामेंट डेवलप करने के लिए एकेडमिक एक्टिविटीज करते हैं। 

हजारों छात्रों को मिलेगा फायदा
कॉसमॉस समिति के सदस्य ध्रुव शुक्ला इस बार 'टेक ब्लिट्ज़ 2.0' नाम से एक आयोजन कर रहे हैं. यह आयोजन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है. ध्रुव शुक्ल ने बताया, "यह आयोजन हम पहले भी कर चुके हैं, लेकिन इस बार इसे और बेहतर तरीके से किया जा रहा है. इसमें हमने आईआईटी, एनआईटी, एमएनआईटी और डीएवीवी जैसे संस्थानों को भी जोड़ा है. इसके साथ ही वहां की कई सोसाइटियों से भी हमारी बात हुई है. वे सभी छात्र इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं. इस आयोजन का फायदा 10 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज के हजारों छात्रों को मिलेगा। 

छात्रों को मिलेगा फील्ड का ज्ञान
जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष डॉ. जेएस ठाकुर ने बताया, " छात्रों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सिलेबस से जुड़ी हुई हर जानकारी दी जाती है. छात्रों के प्रैक्टिकल भी करवाए जाते हैं, लेकिन सिलेबस में कई चीजें ऐसी नहीं हैं, जिनका इस्तेमाल आज के समय में फील्ड पर हो रहा है। 

इंडस्ट्रियलिस्ट तक सीधी पहुंच
उन्होंने आगे कहा, "इंजीनियरिंग के मामले में रोज नई जानकारी और नॉलेज आ रही है, जिसकी जानकारी सिलेबस में शामिल करना कठिन है, क्योंकि यह रोज बदलता है. इसका अनुभव उन लोगों को ज्यादा है जो फील्ड में काम कर रहे हैं. इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे प्रोजेक्ट पर काम होता है, लेकिन रियल वर्ल्ड में रियल प्रॉब्लम पर काम चल रहा होता है, जो बड़े पैमाने पर होता है. इसकी जानकारी वही लोग दे सकते हैं, जो उन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। 

इंजीनियरिंग की लेटेस्ट इनफॉर्मेशन
डॉ. जेएस ठाकुर ने बताया, " छात्रों को नया ज्ञान होना बहुत जरूरी है. इसलिए हमने कॉसमॉस सोसायटी के जरिए अपने ही कॉलेज के पूर्व छात्रों से संपर्क करने का सिलसिला शुरू किया. जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व छात्र देश-दुनिया के कई बड़ी संस्थानों में काम कर रहे हैं. पूर्व छात्र इस बात के लिए तैयार हो गए कि वे इंजीनियरिंग की लेटेस्ट इनफॉर्मेशन अपने जूनियर छात्रों तक पहुंचाएंगे। 

सीनियर इंजीनियर छात्रों को मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देंगे ज्ञान

कॉसमॉस सोसायटी के सदस्य आकाश शर्मा ने बताया, "हमने इंजीनियरिंग कॉलेज के कई पूर्व छात्रों से बात की है और एक शेड्यूल तैयार किया है. इसके तहत दो सप्ताह तक कई सीनियर इंजीनियर विभिन्न विषयों पर ज्ञान देंगे. इसमें मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक विषय शामिल किए गए हैं। 

इंजीनियरिंग की छात्रा धनश्री का कहना है, '' कॉलेज में हमें चीजों की जानकारी हो जाती है, लेकिन इस ज्ञान का इस्तेमाल कैसे करना है, यह फील्ड में बैठा हुआ आदमी ही बता सकता है. सामान्य ज्ञान की जानकारी और उस पर मास्टरी हासिल करने का तरीका हमारे सीनियर ही हमें सीख सकते हैं, जो इस आयोजन के माध्यम से संभव हो पाएगा। 

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