रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव, अब एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से मैनेज होगा सेना का राशन, ईंधन और गोला-बारूद

नई दिल्ली
 भारत अपनी तीनों सेनाओं के साजो-सामान और रसद प्रबंधन को पूरी तरह बदलने की तैयारी में जुटा है. अब तक थलसेना, नौसेना और वायुसेना अपने कलपुर्जों, ईंधन और राशन का हिसाब-किताब अलग-अलग सिस्टम पर रखती रही हैं. किसी एक सेना को जरूरी सामान की तलाश के लिए तीनों के अलग इन्वेंट्री रिकॉर्ड खंगालने पड़ते थे. अब भारत अमेरिकी डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी की तर्ज पर एक संयुक्त और एकीकृत ढांचा खड़ा कर रहा है. इसके तहत एक नया ट्राई-सर्विसेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन तैयार किया जा रहा है. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म तीनों सेनाओं को रियल-टाइम में इन्वेंट्री देखने की सुविधा देगा. यह कदम भविष्य के एकीकृत थिएटर कमांड्स की स्थापना के लिए सबसे अहम आधारशिला माना जा रहा है. रक्षा मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स इस पूरे बदलाव को आगे बढ़ा रहा है। 

तीनों सेनाओं के अलग-अलग डिपो से जंग की तैयारी पर क्या असर पड़ता था?
अब तक भारत में रसद का पूरा ढांचा सेनाओं के हिसाब से अलग-अलग बंटा हुआ था. आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डिनेंस कोर और ईएमई अपना काम अलग तरीके से संभालते थे. इसी तरह नेवी की लॉजिस्टिक्स शाखाएं और एयरफोर्स के मेंटेनेंस डिपो अलग काम करते थे. इससे युद्ध या आपात स्थिति के दौरान तालमेल बैठाने में समय खराब होता था। 

एक ही जगह पर दो सेनाओं के अलग-अलग डिपो होने से सरकारी खर्च भी ज्यादा होता था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अब इस पुराने ढर्रे को खत्म करके संयुक्त लॉजिस्टिक्स नोड्स बनाए जा रहे हैं. पिछले साल कोलकाता में हुए कमांडर्स सम्मेलन में तीन संयुक्त मिलिट्री स्टेशनों की घोषणा भी की गई थी. अब साझा गोला-बारूद डिपो और एयर स्टोर्स सप्लाई पार्क भी देश भर में तैयार किए जाएंगे। 

अमेरिकी डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी की तरह भारत में क्या बदलाव होगा?

राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने अमेरिका की डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी जैसा एक एकीकृत ढांचा बनाने की मांग की थी. अमेरिका में यह एजेंसी पूरी सेना के लिए खरीद, ईंधन सप्लाई, कलपुर्जों के वितरण और वेयरहाउसिंग का काम अकेले संभालती है। 

इस सुझाव के जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के संयुक्त सचिव रियर एडमिरल कुणाल सिंह राजकुमार ने स्थिति साफ की है. उन्होंने पत्र लिखकर बताया कि भारतीय सेना भी अब इसी तरह के एकीकृत ढांचे पर तेजी से आगे बढ़ रही है. रक्षा मंत्रालय के लिए तीनों सेनाओं का लॉजिस्टिक्स एकीकरण इस समय सबसे बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता बन चुका है. इसके लिए पुराने वित्तीय नियमों और खरीद प्रक्रियाओं में भी बड़े सुधार किए जा रहे हैं। 

ट्राई-सर्विसेज लॉजिस्टिक्स एप्लिकेशन से सेना के काम में कितनी तेजी आएगी?
तीनों सेनाओं को एक साथ जोड़ने के लिए ट्राई-सर्विसेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन विकसित किया जा रहा है. यह आधुनिक सॉफ्टवेयर तीनों सेनाओं के अलग-अलग ईआरपी सिस्टम को एक साझा स्क्रीन पर ले आएगा. इसके साथ ही नाटो के स्टॉक नंबर सिस्टम जैसा एक नेशनल डिफेंस कोडिफिकेशन सिस्टम भी तैयार हो रहा है। 

इसके अलावा पीएम गति शक्ति डिफेंस पोर्टल पर भी काम चल रहा है. यह पोर्टल नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म से जुड़ा रहेगा. सेनाओं के बीच प्रक्रियाओं को एक समान बनाने के लिए कई संयुक्त समितियां गठित की जा चुकी हैं. इनमें जॉइंट ऑपरेशंस लॉजिस्टिक्स कमेटी और इंटर-सर्विसेज मेंटेनेंस वर्किंग ग्रुप प्रमुख रूप से शामिल हैं। 

बॉर्डर और ऊंचाई वाले इलाकों में एआई और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस कैसे मदद करेगा?

सशस्त्र बल अब रसद प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का दायरा बढ़ा रहे हैं. रक्षा बलों ने सीमित स्तर पर प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस एनालिटिक्स का इस्तेमाल पहले ही शुरू कर दिया है. इससे यह पहले ही पता चल जाता है कि किस टैंक या विमान का कौन सा पुर्जा कब खराब होने वाला है। 

संसद सदस्य ने अपने पत्र में सुझाव दिया था कि लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे दुर्गम इलाकों में एआई बहुत कारगर साबित होगा. इससे सेना के काफिलों की आवाजाही को बेहतर ढंग से प्लान किया जा सकेगा. हथियारों और गाड़ियों के खराब रहने का समय कम होगा और सीमा पर तैनात सैनिकों की युद्ध तैयारी हमेशा मजबूत रहेगी। 

सुरक्षित मिलिट्री फ्यूल कार्ड सिस्टम से तेल की बर्बादी रुकेगी
पत्र में सेना के लिए एक एकीकृत ईंधन प्रबंधन प्रणाली बनाने की मजबूत वकालत की गई है. इसके तहत आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के लिए तेल की खरीद, भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन को एक किया जाएगा. साथ ही आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के साथ मिलकर एक सुरक्षित मिलिट्री फ्यूल कार्ड की सिफारिश की गई है। 

इस कार्ड सिस्टम को आरएफआईडी, जीपीएस और डिजिटल ऑडिट से जोड़ा जा सकता है. इससे सेना के तेल में होने वाली लीकेज या बर्बादी को पूरी तरह रोका जा सकेगा. इसके अलावा अत्यधिक ठंड और गर्मी में इंजनों की सुरक्षा के लिए एक इंटीग्रेटेड पेट्रोलियम क्वालिटी एश्योरेंस नेटवर्क बनाने का सुझाव भी दिया गया है. इससे खराब मौसम में भी सेना के साजो-सामान बिना रुके काम कर सकेंगे। 

भविष्य के थिएटर कमांड्स के लिए यह एकीकृत ढांचा कितना ज्यादा जरूरी है?
भारत आने वाले समय में थल, नभ और जल सेना को मिलाकर एकीकृत थिएटर कमांड्स बनाने जा रहा है. किसी भी साझा युद्ध रणनीति की कामयाबी इस बात पर टिकी होती है कि सैनिकों को गोला-बारूद और ईंधन कितनी जल्दी मिलता है. अगर युद्ध के मैदान में तीनों सेनाएं अलग-अलग सप्लाई लाइन पर निर्भर रहेंगी तो अभियान धीमा पड़ सकता है। 

नया साझा लॉजिस्टिक्स सिस्टम हर कमांडर को एक ही स्क्रीन पर पूरी स्थिति दिखाएगा. इससे जरूरत के वक्त किसी भी बेस से तुरंत सामान डायवर्ट किया जा सकेगा। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *