भारत-पाक सीमा पर ड्रोन से नशे और हथियारों की तस्करी, एंटी ड्रोन सिस्टम के सामने बड़ी चुनौती

श्रीगंगानग
 भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अब तस्करी की चुनौती सिर्फ तारबंदी पार करने तक सीमित नहीं रही। अब पाकिस्तान की ओर से आने वाले ड्रोन भारतीय सीमा में हेरोइन, विदेशी हथियार और विस्फोटक सामग्री गिराकर लौट रहे हैं। श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टर में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सीमा सुरक्षा के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मौजूदा एंटी ड्रोन व्यवस्था हर तरह के ड्रोन को समय रहते पकड़ने और निष्क्रिय करने में सक्षम नहीं दिख रही।

तस्कर ड्रोन की ऊंचाई, गति और उड़ान का तरीका बदलकर सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन रडार अथवा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की पकड़ से बच निकलते हैं और निर्धारित स्थान पर खेप गिराकर वापस पाकिस्तान लौट जाते हैं। ऐसे में केवल सीमा पर गश्त बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत ऐसी बहुस्तरीय तकनीकी सुरक्षा की है, जो ड्रोन की पहचान, उसकी लगातार ट्रैकिंग और उसे निष्क्रिय करने की क्षमता रखती हो।

बीएसएफ के राजस्थान फ्रंटियर में पिछले दो-तीन सालों के दौरान श्रीगंगानगर व बीकानेर सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में हेरोइन व हथियारों की खेप गिराने की घटनाएं लगातार सामने आने के बाद इन दो सेक्टर में एंटी ड्रोन सिस्टम विकसित किया गया, लेकिन इसकी क्षमता कम होने से ड्रोन ड्रॉपिंग की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पाया।

पुलिस के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि हमारे एंटी ड्रोन सिस्टम की रेंज कम होने से वह सीमा पार से ज्यादा ऊंचाई पर आने वाले ड्रोन को पकड़ नहीं पाता, जिससे ड्रोन ड्रापिंग की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लग पाया। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी तस्कर ड्रोन को ज्यादा ऊंचाई पर उड़ाते हुए सीमा पार करवाते हैं और निर्धारित स्थान पर हेरोइन या हथियारों की खेप गिराने के लिए ड्रोन को कम ऊंचाई पर लाकर पुन: ज्यादा ऊंचाई पर उड़ाते हुए अपने इलाके में ले जाते हैं।

गृहमंत्री कर चुके घोषणा
इस चुनौती को देखते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसी साल 26 मई को बीकानेर सेक्टर में बीएसएफ की सांचू बॉर्डर पोस्ट पर बीएसएफ जवानों को संबोधित करते हुए अगले छह माह में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्रभावशाली एंटी ड्रोन सिस्टम स्थापित करने की बात कही थी। उन्होंने बीएसएफ, सेना, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों के समन्वय से चार स्तरीय सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया था।अब उस योजना पर काम चल रहा है।

इसी बीच पुलिस ने भी बीएसएफ की मौजूदा व्यवस्था के अतिरिक्त श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों में अपना एंटी ड्रोन सिस्टम लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय से बातचीत की जा रही है। प्रस्ताव का उद्देश्य सीमा सुरक्षा में एक अतिरिक्त तकनीकी सुरक्षा घेरा तैयार करना है।

इस साल अब तक ड्रोन से पहुंची खेप के प्रमुख मामले
तारीख              सेक्टर/स्थान                बरामदगी
10 जनवरी    अनूपगढ़, श्रीगंगानगर    4 किलो हेरोइन
11 फरवरी    खाजूवाला, बीकानेर    2.25 किलो हेरोइन
9 मार्च    रायसिंहनगर, श्रीगंगानगर    6.4 किलो हेरोइन
26 मार्च    रावला, बीकानेर सेक्टर    10.8 किलो हेरोइन
5 अप्रैल    करणपुर, श्रीगंगानगर    12.167 किलो हेरोइन
19 जुलाई    हिंदुमलकोट, श्रीगंगानगर    1 किलो हेरोइन
12 अक्टूबर    रावला, श्रीगंगानगर    7 किलो संदिग्ध आरडीएक्स, 2 पिस्तौल और करीब 650 कारतूस

संयुक्त सूचना तंत्र हो मजबूत
ड्रोन से तस्करी के मामलों में एक और गंभीर पहलू स्थानीय नेटवर्क है। ड्रोन से गिराई गई खेप को उठाने के लिए पंजाब और राजस्थान के स्थानीय तस्कर पहले से सक्रिय रहते हैं। इसलिए बीएसएफ की योजना में तकनीकी निगरानी के साथ पुलिस, एएनटीएफ और खुफिया एजेंसियों का संयुक्त सूचना तंत्र भी अहम होना चाहिए। अक्टूबर में रावला क्षेत्र में तीन ड्रोन उड़ानों से संदिग्ध आरडीएक्स, पिस्तौल और कारतूस गिराए जाने की घटना इस खतरे की गंभीरता बताती है।

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